

सहारनपुर क्लब, एक प्रतिष्टित संस्था, 30 मिनट, 300 शब्दो की भयंकर सुनामी, उठे जलजले से थर्राता अनपढ़, माफी मांग कर जान बचाई, अनपढ़ अब पुनः सक्रिय, अधिकारियों सहित भाजपा नेता और उपस्तिथ सदस्यो को बताया चमचा: सूत्र
*22 जून के प्रकरण की सुनामी की तरंगों के उठे जलजले के बनोगे के घावों को लेकर पुनः चर्चा प्रारम्भ, अनपढ़ द्वारा अधिकारी और भाजपा नेता के विरुद्ध मोर्चा खोला, क्या पुनः उक्त घटना की होगी पुनरावर्त्ति: सूत्र*
22 जून प्रकरण अब भी निपटने का नाम नही ले रहा, आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला इस कदर चलता प्रतीत हो रहा है, कि लगता है धीरे धीरे सारे भेद अब खुल कर बाहर आ जाएंगे। 30 मिनट में 300 अपशब्दों की सुनामी झेलने के पश्चात अनपढ़ व्यक्ति ने भी अपने विश्वस्त सूत्रों के अनुसार उस अधिकारी ओर घटना के समय उपस्तिथ सदस्यो को अधिकारी का चमचा बताते हुए उल्टे आरोप लगाने प्रारम्भ कर दिए बताये जा रहे है। उक्त पीड़ित अनपढ़ द्वारा इस पूरे प्रकरण के लिए एक भाजपा नेता को घटना के समय अधिकारी को भड़काने का दोषी बताते हुए उन्हें उस अधिकारी का चमचा तक बता डाला। सूत्रों की माने तो 22 जून की घटना के बाद ऐसे सभी व्यक्ति जिनसे कार्य करने के नाम पर अथवा टूर्नामेंट या सरकारी फ़ाइल में हस्तक्षेप के नाम पर सुविधा शुल्क लिया गया था वह उन सभी ने वापिस मांगना प्रारम्भ कर दिया बताया जाता है, लेकिन हठधर्मिता देखिए जनाब उक्त पीड़ित ने अब स्पष्ट रूप से तत्कालीन अधिकारी पर ही दोष मढ़ना प्रारम्भ कर दिया है यही नही पीड़ित अनपढ़ के करीबी सूत्रों के अनुसार उक्त गुजरात कैडर अधिकारी के साथ भाजपा नेता पूर्णतया जिम्मेदार है, अब सवाल है कि 22 जून की उक्त विस्मयकारी घटना जिसके बाद पूरे जनपद में तूफान मचना स्वाभाविक था लेकिन पूरे 4 माह बाद अचानक ऐसा क्या हुआ कि इस पीड़ित अनपढ़ के सुर ही बदल गए जबकि अपशब्दों की सुनामी के बाद उठे जलजले के सुलगते बाणों के घावों के बाद यह पीड़ित अनपढ़ घुटने पर बैठ कर माफी भी मांग आया बताया गया, अब दोष इस पीड़ित अनपढ़ का है अथवा उक्त लोकप्रिय अधिकारी का, यह तो कहना मुश्किल है लेकिन एक बात अवश्य है कि *कुछ मजबूरियां रही होंगी वरना यू ही कोई बेवफा नही होता* लेकिन इतना अवश्य है कि 22 जून की घटना के नायक तत्कालीन जिलाधिकारी अत्यंत लोकप्रिय अधिकारियों में शुमार रहे है और यह पीड़ित अनपढ़ उनके यह ड्योढ़ी पर कैसे बैठता था कहने की आवश्यकता नही है। जबकि उसी दौरान इस को उक्त अधिकारी के आवास से धक्के देकर निकलवा दिया गया था, अब यदि लोग अपने पैसे मांगने के लिए मुखर है तो यह उनका हक है, जबकि तत्कालीन जिलाधिकारी सभी को एक बात खुले रूप से कह गए थे कि इस अनपढ़ पीड़ित को किसी भी प्रकार का पैसा न दिया जाए, परन्तु न जाने कैसे लोग इस के कुटिल झांसे में आ गए, जिस भाजपा नेता के ऊपर आज अनपढ़ द्वारा आरोप लगाया जा रहा है, उसी के यहां कभी इसकी हाज़िरी लगा करती थी, सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अब इसके द्वारा लोकप्रिय अधिकारी पर आरोप लगवाना कितना सार्थक है यह इसकी विश्वसनीयता पर भी प्रश्न चिन्ह लगाता है, बहरहाल अनपढ़ की बातों को लेकर डर है कही 22 जून की सुनामी की पुनरावर्त्ति ना हो जाये, साथ ही इसको लेकर जिन लोगो के पैसे उस वक्त लिए गए है उन सबकी एक बैठक इस बात को लेकर भी होने जा रही है कि इसके द्वारा अधिकारियों के नाम पर लिया गया पैसा कैसे वसूल हो, वह भी तब जब अधिकारियों द्वारा स्पष्ट इस अनपढ़ को पैसे देने से मना।किया गया था। बहरहाल देखते है क्या होता है।
खबर सूत्रों के हवाले से











